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सत्ताधारियों और अपराधियों की मिली भगत का खामियाजा कर्तव्यनिष्ठ पुलिस कर्मियों को भुगतना पड़ा - अखिलेश यादव
July 3, 2020 • AMIT VERMA • उत्तर प्रदेश


वेब वार्ता(न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा 
लखनऊ 3 जुलाई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कानपुर नगर के चौबेपुर थानान्तर्गत बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी को पकड़ने गई पुलिस टीम के 8 वीरों की शहादत पर श्रद्धांजलि देते हुए संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। राज्य सरकार से शहीद पुलिस कर्मियों को एक-एक करोड़ तथा घायलों को 50-50 लाख रूपए देने की उन्होंने मांग की है।
      उत्तर प्रदेश के अपराधिक जगत की इस सबसे शर्मनाक घटना में सत्ताधारियों और अपराधियों की मिली भगत का खामियाजा कर्तव्यनिष्ठ पुलिस कर्मियों को भुगतना पड़ा है। भाजपा सरकार की यह ऐतिहासिक नाकामी है। बेलगाम अपराधियों ने नृशंस हत्या ही नहीं की मृत पुलिस कर्मियों के असलहे भी लूट ले गए। भाजपा राज में अपराधियों का मनोबल बढ़ गया है।
      अब तो इस सच्चाई को स्वीकार करने में ही भाजपा सरकार की भलाई है कि उत्तर प्रदेश में माफियाओं की समानांतर सरकार चल रही है। राज्य में अपराधिक अवांछित तत्वों का साम्राज्य कायम हो चुका है। यह सब ‘ठोकों नीति‘ का ही परिणाम है कि अपराधी पुलिस को ठोकने का दुस्साहसपूर्ण कृत्य करने में आगा-पीछा नहीं सोचते हैं। आखिर इतना जघन्य काण्ड करने की बदमाशों की हिम्मत कैसे पड़ गई?
      मुख्यमंत्री जब तब दावा करते रहे हैं कि उनके राज में अपराधी या तो जेल भेजे गए या प्रदेश के बाहर चले गए। भाजपा नेता विकास दुबे दुर्दान्त हिस्ट्रीशीटर है। उस पर 25 हजार रूपए का इनाम था। 20 साल पहले थाने में घुसकर उसने हत्याएं की थीं। राज्य सरकार के पास इस बात का क्या जवाब है कि इस सबके बावजूद वह कैसे रह रहा था?
    कानपुर की एक अकेली घटना नहीं। राजधानी लखनऊ के पारा क्षेत्र में एक मजदूर की कूच-कूच कर हत्या कर दी गई, लखनऊ के ही गोमतीनगर विस्तार में एक अवकाश प्राप्त डीआइजी के घर में घुसे युवक की थाना में मौत हो गई। उसके फांसी लगाने की कहानी बताई गई। प्रयागराज में 4 हत्याएं, अमरोहा में युवक की गोली मारकर हत्या, गाजियाबाद के साहिबाबाद में पिता और आठ साल की बच्ची की हत्या हुई और महोबा में पैरौल पर आए कैदी की हत्या हुई। सोनभद्र में निषादों की हत्या की गई। इन हत्याओं से प्रदेश थर्राया है। भाजपा ने अपने काले कारनामों से उत्तर प्रदेश को हत्या प्रदेश बना दिया है।  
     सच तो यह है कि भाजपा नेतृत्व की अहंकारी भाषा ने उत्तर प्रदेश को डुबो दिया है। पूरा राज्य डरा-सहमा हुआ है। कानून के राज्य की क्या यही परिभाषा है? जब अपराधी बेखौफ होकर जेल से भी अपना कारोबार चला रहे हैं तो फिर जनता की रक्षा कौन करेगा? क्या प्रदेश में कानून व्यवस्था संविधान के अनुसार कायम है? कानपुर की घटना ने तो प्रदेश के रामराज्य और कानून की धज्जियां उड़ा दी है। यह पूरी व्यवस्था के लिए खुली चुनौती है।
     उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार अपनी पोलपट्टी खुलने के डर से आनन-फानन में मुख्य अपराधी को न पकड़कर छोटी-मोटी मुठभेड़ दिखाने का नाटक करवा रही है। इससे पुलिस कर्मियों का मनोबल और गिरेगा। अपराधियों को जिन्दा पकड़ कर वर्तमान सत्ता का भंडाफोड़ होना चाहिए।