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राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस पर एबीवीपी कार्यकर्ताओ ने किया वृक्षारोपण
July 10, 2020 • AMIT VERMA • उत्तर प्रदेश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहे ना रहें

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
वाराणसी 9 जुलाई। आज दिनांक 09/07/2020 को एबीवीपी के 72 वें स्थापना दिवस व राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद काशी महानगर के दर्जनों कार्यकर्ताओं द्वारा मैदागिन स्थित भारतेंदु हरीशचंद्र उद्यान में 51 वृक्ष लगाकर वृक्षारोपण किया गया।
       इस अवसर पर एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री शुभम कुमार सेठ ने सर्वप्रथम विश्व के सभी राष्ट्रप्रेमी बंधु व भगिनीयों को विश्व के सबसे बड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 72 वें स्थापना दिवस व "राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस" की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एबीवीपी का कार्यकर्ता होना गर्व की बात है एवं विद्यार्थी परिषद का हर कार्यकर्ता निरन्तर अपने दायित्वों का निर्वहन छात्र छात्राओं तथा समाजहित मे करता रहता है।
    इसी क्रम में "राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस" के अवसर पर एबीवीपी कार्यकर्ताओ ने 51 पौधे लगाए। ततपश्चात आशीष सिंह ( महानगर संगठन मंत्री ) ने वृक्षारोपण के महत्व को बताते हुये कहा कि वृक्षारोपण का शाब्दिक अर्थ है। वृक्ष लगाकर उन्हें उगाना इसका प्रयोजन करना है। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना। मानव के जीवन को सुखी, सम्रद्ध व संतुलित बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण का अपना विशेष महत्व है। मानव सभ्यता का उदय तथा इसका आरंभिक आश्रय भी प्रकृति अर्थात वन व्रक्ष ही रहे हैं। मानव को प्रारम्भ से प्रकृति द्वारा जो कुछ प्राप्त होता रहा है। उसे निरन्तर प्राप्त करते रहने के लिए वृक्षारोपण अति  आवश्यक है।
      मानव सभ्यता के उदय के आरंभिक समय में वह वनों में वृक्षों पर या उनसे ढकी कन्दराओं में ही रहा करता था। वह (मानव) वृक्षों से प्राप्त फल-फूल आदि खाकर या उसकी डालियों को हथियार के रूप में प्रयोग करके पशुओं को मारकर अपना पेट भरा करता था। वृक्षों की छाल की वस्त्रों के रूप में प्रयोग करता था। यहाँ तक कि ग्रन्थ आदि लिखने के लिए जिस सामग्री का प्रयोग किया जाता था। वे भोज–पत्र अर्थात विशेष वृक्षों के पत्ते ही थे। वृक्ष वातावरण को शुद्ध व स्वच्छ बनाते है। इनकी जड़ें भूमि के कटाव को रोकती है। वृक्षों के पत्ते भूमि पर गिरकर सड़ जाते हैं। तथा ये मिट्टी में मिलकर खाद बन जाते है। और भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते है।
       मानव सभ्यता के विकास के साथ जब मानव ने गुफाओं से बाहर निकलकर झोपड़ियों का निर्माण आरंभ किया तो उसमें भी वृक्षों की शाखाएं व पत्ते ही काम आने लगे, आज भी जब कुर्सी, मेज, सोफा, सेट, रेक, आदि का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। यह भी मुख्यतः लकड़ी से ही बनाए जाते हैं। अनेक प्रकार के फल-फूल और औषधियों भी वृक्षों से ही प्राप्त होती है। वर्षा जिससे हमें जल व पेय जल प्राप्त होते हैं वह भी प्राय वृक्षों के अधिक होने पर ही निर्भर करती है। इसके विपरीत यदि हम वृक्ष-शून्य की स्थिति की कल्पना करें तो उस स्थिति में मानव तो क्या समुची जीव सृष्टि की दशा ही बिगड़ जाएगी। इस स्थिति से बचने के लिए वृक्षारोपण करना अत्यंत आवश्यक है।
        आजकल नगरों तथा महानगरों में छोटे-बड़े उद्योग–धंधों की बाढ़ से आती जा रही है। इनसे धुआं, तरह-तरह के विषैली गैसें आदि निकलकर वायुमंडल में फेल कर हमारे पर्यावरण में भर जाती है। पेड़ पौधे इन विषैली गैसों को वायुमंडल में फैलने से रोक कर पर्यावरण को प्रदूषित होने से रोकते हैं। यदि हम चाहते हैं कि हमारी यह धरती प्रदूषण रहित रहे तथा इस पर निवास करने वाला मानव सुखी व स्वस्थ बना रहे तो हमें पेड़-पौधों की रक्षा तथा उनके नवरोपण की ओर ध्यान देना चाहिए।
          इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से आशीष सिंह (महानगर संगठन मंत्री), शुभम सेठ ( गंगापुर पूर्व परिसर अध्यक्ष ), अंकिता तिवारी ( प्रान्त कार्यसमिति सदस्य ), रोहित विश्वकर्मा , आकाश सेठ , सौरभ सेठ, मोनू गुप्ता, अजय सिंह, सोनू सेठ आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।