ALL अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश अन्य राज्य बिजनेस खेल सिनेमा रोजगार धर्म मेट्रोमोनियल
डी0जी0पी0 ने अपहरण/फिरौती मामले में कड़ाई से अनुपालन हेतु दिशा निर्देश निर्गत किये
July 28, 2020 • AMIT VERMA • उत्तर प्रदेश

वेबवार्ता(न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा 
लखनऊ 28 जुलाई। एच0सी0 अवस्थी, पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 द्वारा समस्त जोनल अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, पुलिस महानिरीक्षक, एसटीएफ, परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक/ पुलिस उपमहानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, प्रभारी जनपद उ0प्र0 को अपहरण/फिरौती हेतु अपहरण में कृत कार्यवाही से सम्बन्धित मुख्यालय स्तर से आवश्यक दिशा-निर्देश निर्गत किये गये है, का कड़ाई से अनुपालन कराते हुए उक्त क्रम में इस प्रकार अपराधों की प्रभावी रोकथाम हेतु विवेचनात्मक कार्यवाही, बरामदगी आदि के संबंध में निम्न निर्देश दिये गये हैः-


ऽ घटना की सूचना प्राप्त होते ही तत्काल घटना स्थल का थाना प्रभारी, क्षेत्राधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा निरीक्षण किया जाये।
ऽ यदि शिकायतकर्ता का स्पष्ट आरोप है कि अपहृत/अपहृता का अपहरण किसी अपराध घटित करने के उदेश्य से हुआ है, तो तदानुसार अपराध उचित धारा में पंजीकृत होगा। 
ऽ फिरौती हेतु अपहरण से सम्बन्धित अपराधों में अविलम्ब प्रथम सूचना रिपोर्ट धारा 364ए भादवि के अन्तर्गत पंजीकृत कर कार्यवाही की रूपरेखा का निर्धारण किया जाए। ऐसे प्रकरणों में किसी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नही की जायेगी।  
ऽ अपहृत/अपहृता की सकुशल बरामदगी कराने हेतु थानाध्यक्ष, क्षेत्राधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक द्वारा कार्ययोजना एवं पुलिस अधीक्षक के साथ 
समन्वय बनाकर टीमों का गठन कर कार्य आवंटित किया जाये।
ऽ फिरौती हेतु अपहरण के मामलों में 24 घण्टे के अन्दर अपहृत/अपहृता का फोटो सहित पूर्ण विवरण प्राप्त कर प्रदेश एवं देश के अन्य राज्यों में प्रेषित कर वहां से जानकारी हासिल किये जाने की कार्यवाही सुनिश्चित करंे।
ऽ फिरौती हेतु अपहरण की घटनाओं में पूर्व में सम्मिलित अपराधियों पर भी सक्रिय निगरानी रखते हुए उनकी संलिप्तता के आधार पर कार्यवाही की जाय। 
ऽ यदि अपहृत के पास मोबाइल फोन है तो उससे सम्बन्धित डाटा जो उपलब्ध हों, उसका तकनीकी परीक्षण तथा परिष्करण भी नियमानुसार कराया जाए। इस कार्य हेतु जनपद में सक्रिय सर्विलांस टीम को लगाया जाये। 
ऽ अपहृत/अपहृता की बरामदगी हेतु एक विशेष टीम का गठन किया जाए तथा आवश्यकतानुसार एसटीएफ की सम्बद्धता हेतु उच्चाधिकारियों से तत्काल सम्पर्क स्थापित किया जाए।
ऽ यदि प्रकरण में किसी आपराधिक गिरोह के संलग्न होने का संदेह हो तो एक से अधिक टीमें बनाकर समस्त सूचनाएं एकत्रित करते हुए तेजी से अपराधियों को पकड़ने तथा अपहृत/अपहृता को तत्काल बरामद किया जाए।
ऽ नामित अभियुक्तों से भी की गयी पूछताछ की वीडियो रिकार्डिंग, अभियुक्त का पोलीग्राफ टेस्ट, बे्रन मैपिंग एवं नार्को एनालिसिस टेस्ट विधि सम्मत कराये जाए और विधिक आवश्यकता पड़ने पर अभियुक्त को पुलिस रिमाण्ड पर लिया जाए।
ऽ पर्यवेक्षण- वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ऐसे प्रकरणों में अपहृत की सकुशल बरामदगी तक निरन्तर समीक्षा की जायेगी ।
ऽ आवश्यकतानुसार जनपदीय स्तर पर इस प्रकार के प्रकरणों में सहायता हेतु सम्बन्धित जनपद प्रभारी एण्टी हयूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, महिला चाइल्ड हेल्पलाइन एवं गैर सरकारी संगठनों की सहायता अपने विवेक से ले सकते है।