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भाजपा सरकार सेवा नियमावली का उल्लंघन करने वालों को पुरुस्कृत कर रही है - डॉ मसूद अहमद
June 9, 2020 • AMIT VERMA • उत्तर प्रदेश


वेबवार्ता(न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा
लखनऊ 9 जून। कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या आरती लालचंदानी मुस्लिम विरोधी मानसिकता से ओतप्रोत होकर घ्रणित बयानबाजी करने के स्प्ष्ट आरोप के बाद भी उनकी सेवा से बर्खास्तगी के बजाय झांसी मेडिकल कालेज स्थानांतरित करना साफ करता है कि उन्होंने कोरोना संक्रमणकाल में भाजपा व संघ के एजेंडे को आगे बढाते हुए सरकार के संरक्षण व इसारे पर पूरी बयानबाजी की थी। उनकी सेवा से बर्खास्तगी के साथ समाज मे नफरत, टकराव, वैमनस्यता व उतपन्न करने के आरोप में आपराधिक मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी करायी जाए। 
        राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मंत्री डॉ मसूद अहमद ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि समाज मे नफरत का विषवमन करने वाली डॉ लालचंदानी को सेवा नियमावली का उलंघन व  इसके बाद भी उनकी बर्खास्तगी के स्थान पर स्थानांतरण करना यह साबित करता है कि सरकार कर्मचारियों को भी साम्प्रदायिकता फैलाने के मोर्चे पर लगाकर उन्हें इनाम दे रही है। डॉ लालचंदानी ने कोरोना संक्रमणकाल में भाजपा नेताओं की तरह अनर्गल व आपत्तिजनक आरोप लगाते हुये तब्लीगी जमात पर टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार से अनुरोध किया था कि  तब्लीगी जमात के लोग आतंकवादी है इनके इलाज पर  वह  अपने संसाधनों को बेकार न करे बल्कि उनको जेल की सलाखों के पीछे या जंगलों में छोड़ दिये जाने के साथ मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध अभद्र,अमर्यादित टिप्पणियां विभिन्न माध्यमो से करती रही उनके वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए उन्हें तब्लीगी जमात के बारे में यह कहते सुना जा सकता है कि "ये लोग आतंकी हैं, लेकिन उन्हें वीआईपी उपचार दिया जा रहा है"।
         उन्होंने आगे कहा कि उनके अस्पताल को समूह से जुड़े रोगियों के लिए अपने संसाधनों को खत्म करना पड़ा, डॉक्टरों को जोखिम में डालना पड़ा रहा है,सरकार सिर्फ तुष्टीकरण करने के लिए इन लोगों को अस्पताल में भर्ती करवा रही है, उन्होंने सरकार को सलाह देते हुए कहा था कि इनके साथ सख्ती से पेश आना चाहिए। इसके बाद भी उनका कानपुर से झांसी मेडिकल कालेज स्थानांतरण किया जाना साबित करता है कि मुस्लिमो के विरुद्ध विषवमन सरकार के इसारे पर कराया गया,रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए सरकार से कहा की वह  कानपुर मेडिकल कालेज की प्राचार्य का अपराध बहुत गम्भीर है उन्होंने समाज को तोड़ने का पाप किया है, अगर सरकार से उनकी मिलीभगत नही है तो उन्हें सरकारी सेवा नियमावली के उलंघन पर बर्खास्त करने व समाज मे मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध नफरत पैदा करने का आरोप में आपराधिक मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करना ही दंडात्मक कार्यवाही मानी जा सकती है। 
        डॉ मसूद ने कहा कि ज्ञातव्य है कि कानपुर के जिलाधिकारी ब्रह्मदेव तिवारी ने इस प्रकरण की रिपोर्ट प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे को सौंपी थी, रिपोर्ट के बाद भी डॉ लालचंदानी पर कार्रवाई न  करते हुए मात्र  झांसी स्थानान्तरण  किया जाना मामले की लीपापोती के अतिरिक्त कुछ नही है।