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अनिल राजभर ने पूर्वांचल में आयी बाढ़ एवं रहत कार्यों का निरीक्षण किया
August 7, 2020 • AMIT VERMA • उत्तर प्रदेश

वेबवार्ता(न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा 
लखनऊ 07 अगस्त। उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री अनिल राजभर ने आज यहां लोकभवन में प्रेस प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए बताया मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार आज जनपद गोण्डा, संतकबीरनगर, मऊ, देवरिया एवं गोरखपुर में राज्यमंत्री जलशक्ति बलदेव औलख व अपर मुख्य सचिव, सिंचाई के साथ बाढ़ राहत कार्य, स्वास्थ्य, बचाव दल की उपलब्धता तथा बाढ़ के संबंध में समस्त तैयारियों के बारे में जिलाधिकारी तथा जनपद के अन्य अधिकारियों के साथ गहन समीक्षा की गई तथा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय भी निरीक्षण किया।
         श्री राजभर ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश दिये गये है कि बाढ़ राहत शरणालयों में रह रहे किसी भी व्यक्ति में ज्वर, खांसी, सिरदर्द आदि के लक्षण प्रदर्शित होने पर उनको शेष शरणार्थियों से अलग किया जाए और कोविड-19 के दृष्टिगत आवश्यकता अनुसार टेस्टिंग, भर्ती, उपचार आदि की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि कैम्प में रह रहे वृद्धों, महिलाओं तथा बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुविधायें व सामग्री उपलब्ध करायी जाए। सैनेटाइजेशन तथा हाईजीन का विशेष ध्यान रखा जाए।
        श्री राजभर ने बताया कि जनपद संतकबीरनगर में बन्धो की सतत निगरानी के साथ-साथ होम गार्ड, च्त्क् के गोताखोरों को क्षेत्र में तैनात करने के निर्देश दिया गया। उन्होंने बताया कि चिकित्सा विभाग द्वारा धनघटा क्षेत्र में प्रतिदिन कैम्प लगाया जा रहा है और जनहानि के प्रकरणों में तत्काल सहायता देने के निर्देश दिये गये। जनपद गोरखपुर में तटबंध की लगातार पेट्रोलिंग की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए की अल्पावधि में समस्त तटबंध जो क्षतिग्रस्त हुए हैं या लीकेज हो रहे हैं को रिपेयर किया जा सके तथा राहत एवं बचाव कार्य में प्रशिक्षित होमगार्ड और पीआरडी के जवानों को भी सम्मिलित करने के निर्देश दिये गये। उन्होंने बताया कि तटबंध हो या अन्य स्थलों जहां पर बाढ़ से प्रभावित व्यक्तियों ने शरण ले रखा है वहां पर पर्याप्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा विद्युत आपूर्ति के दौरान संबंधित विभाग यह सुनिश्चित कर लें कि किसी प्रकार का कोई खतरा या दुर्घटना ना होने पाए। राहत सामग्री किट को समय-समय पर जांच किया जाए जिससे कि किसी भी प्रकार की कोई खराब क्वालिटी की सामग्री वितरित ना होने पाए। उन्होंने बताया कि कंट्रोल रूम को सशक्त किए जाने हेतु बल दिया गया जिससे कि यदि किसी भी प्रभावित व्यक्ति द्वारा कोई सूचना उपलब्ध कराई जाती है तो उस पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये है।
       श्री राजभर ने बताया कि जनपद गोण्डा में तटबंधों पर विशेष सर्तकता व 24 घंटे पेट्रोलिंग करने के भी निर्देश दिये गये है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हर संभव राहत पहुचाने के लिए अधिकारी को निर्देश दियें तथा नावें क्षतिग्रस्त न हो व उस पर क्षमता से ज्यादा आदमी ना बैठने पाएं और क्षमता से अधिक सामान भी न रखा जाए। लाइटिंग व जनरेटर की व्यवस्था की जाए और पहले से ही यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी का तेल व डीजल की व्यवस्था सुनिश्चित हो। बाढ़ प्रभावितों को दी जाने वाली राशन किट में सभी सामान मानक के अनुरूप हो। जलजमाव वाले क्षेत्रों में छिड़काव की भी व्यवस्था हो तथा पानी उतरते समय विशेष ध्यान रखा जाय ताकि बीमारियां न फैलने पाएं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक प्रबन्ध किए जाएं तथा आपदा प्रबन्धन का प्रशिक्षण कर चुके होम गार्डों की ड्यूटी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगाई जाय। तटबन्धों पर विशेष सतर्कता बरती जाय और सम्भावित खतरे को देखते हुए सभी तैयारियां पहले से ही कर ली जाएं। कन्ट्रोल रूम से रोजाना बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लेखपाल व ग्राम प्रधान व अन्य कर्मियों से सुबह ही वार्ता कर स्थिति की जानकारी प्राप्त कर ली जाय और कन्ट्रोल रूम को पूरी तरह से सक्रिय रखा जाय। उन्होंने बताया कि जनपद देवरिया में नाव पर कितने लोग सवार होने चाहिए, इसके लिए एक स्पष्ट कटौती संदेश बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए, बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में मेडिकल टीमें सक्रिय होनी चाहिए और कोविड-19 प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये गये। बाढ़ के खतरे वाले गांवों में विद्युत पोल और केबल के लिए विशेष सुरक्षा उपाय करने के साथ-साथ संवेदनशील तटबंध पर 24×7 गश्त करने के भी निर्देश दिये।
       श्री राजभर ने बताया कि जनपद गोरखपुर में राप्ती नदी के दायें तट पर स्थित असवनपार गहिराघाट तटबंध के कि0मी0 1.500 पर निर्मित स्पर एवं कि0मी0 1.800 पर निर्मित डैप्नर के नोज का कुछ भाग क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसकी मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। कि0मी0 1.900 से कि0मी0 2.100 के मध्य ग्राम पूरे कटान स्थल पर बम्बूक्रेट कटर लगा कर कटान स्थल को सुरक्षित किया जा रहा है। जनपद बलिया में सरयू (घाघरा) नदी केे दायें तट पर स्थित बकुलहा संसार टोला तटबंध के कि0मी0 4.125 के मध्य निर्मित टी-स्पर के नोज भाग के अपस्ट्रीम में स्लोप क्षतिग्रस्त हो गया है। कटान को रोकने हेतु तुरंत सीमेंट की खाली बारी में ब्रिक रोड़ा भर कर गैवियान रोप में डालकर फ्लट फाईटिंग का कार्य कराया जा रहा है। कटान स्थल पर जी0 आई0 वायर क्रेट में बोल्डर डाल कर कटर निर्माण का कार्य कराय जा रहा है। सतत् निगरानी की जा रही है।
      श्री राजभर ने बाढ़ की स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि प्रदेश के वर्तमान में सभी तटबंध सुरक्षित है। प्रदेश में बाढ़ के संबंध में निरन्तर अनुश्रवण किया जा रहा है। कहीं भी किसी प्रकार की चिंताजनक परिस्थिति नहीं है। प्रदेश के प्रभावित जनपदों मंे सर्च एवं रेस्क्यू हेतु एन0डी0आर0एफ0 की 15 टीमें तथा एस0डी0आर0एफ0 व पी0ए0सी0 की 07 टीमें इस प्रकार कुल 22 टीमें तैनाती की गयी है। 749 नावें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगायी गयी है। बाढ़/अतिवृष्टि की आपदा से निपटने हेतु बचाव व राहत प्रबन्धन के सम्बन्ध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये जा चुके है।
      श्री राजभर ने बताया कि बाढ़ पीड़ित परिवारों को खाद्यान्न किट का वितरण कराया जा रहा है। इस किट में 17 प्रकार की सामग्री जिसमें 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 10 किलो आलू, 05 किलो लाई, 02 किलो भूना चना, 02 किलो अरहर की दाल, 500 ग्रा0 नमक, 250 ग्रा0 हल्दी, 250 ग्रा0 मिर्च, 250 ग्रा0 धनिया, 05 ली0 केरोसिन, 01 पैकेट मोमबत्ती, 01 पैकेट माचिस, 10 पैकेट बिस्कुट, 01 ली0 रिफाइन्ड तेल, 100 टेबलेट क्लोरीन एवं 02 नहाने के साबुन वितरित किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि अब तक राहत सामग्री के अन्तर्गत 24,346 खाद्यान्न किट व 1,49,918 मी0 तिरपाल का वितरण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि 252 मेडिकल टीम लगायी गयी है।
      श्री राजभर ने बताया कि बाढ की आपदा से निपटने के लिए प्रदेश में 236 बाढ़ शरणालय, और 04 जनपदों में 44 शरणालयों में 4,087 व्यक्ति रह रहे है तथा 715 बाढ़ चैकी स्थापित की गयी है। वर्तमान में प्रदेश के 17 जनपद (अम्बेडकरनगर, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बाराबंकी, बस्ती, गोण्डा, गोरखपुर, कुशीनगर, लखीमपुरखीरी, मऊ, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज तथा सीतापुर) के 706 गांवों बाढ़ से प्रभावित है। शारदा नदी, पलिया कला लखीमपुरखीरी, सरयू नदी, तुर्तीपार बलिया राप्ती नदी बर्डघाट गोरखपुर, सरयू (घाघरा) नदी-एल्गिनब्रिज बाराबंकी और अयोध्या में अपने खतरे के जलस्तर से ऊपर बह रही है। प्रदेश में 164 पशु शिविर स्थापित किये गये है तथा 6,05,833 पशुओं का टीकाकरण भी किया गया हैं। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 868 कंुतल भूसा वितरित किया गया है। आपदा से निपटने के लिए जनपद एवं राज्य स्तर पर आपदा नियंत्रण केन्द्र की स्थापना की गयी है। उन्होंने कहा कि किसी को भी बाढ़ या अन्य आपदा के संबंध में कोई भी समस्या होती है तो वह जनपदीय आपदा नियंत्रण केन्द्र या राज्य स्तरीय कंट्रोल हेल्प लाइन नं0-1070 पर फोन कर सम्पर्क कर सकता है।
       इस अवसर पर राज्यमंत्री जल शक्ति बलदेव औलख व अपर मुख्य सचिव, सिंचाई, राहत आयुक्त संजय गोयल उपस्थित रहे।- इंजेश सिंह